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|| सुविचार ||

01

श्री महापात्र

मनुष्य को ग्रह और पितृ कभी अवरोधक नहीं बनते, अवरोधक बनते है केवल खुद के कर्म और अनजाने में की गई गलतियां।

02

श्री महापात्र

जीवन को अपनी आँखों से देखो और खुद के निर्णय सरल भाषामें रखो।

03

श्री महापात्र

चारित्र्यवान व्यक्ति मजबूत पेड़ जैसा होता है, जिसको तूफान भी झूका नहीं सकता।

04

श्री महापात्र

गुस्सा दूसरों की बजाय खुदको ही ज्यादा नुकशान पहुँचाता है।

05

श्री महापात्र

कोई भी व्यक्ति शक्ति पर से विश्वास गवाँता है, तब उस का विनाश होता है।

06

श्री महापात्र

जब तक जीवन है तब तक जीने की कला शिखते रहो।

07

श्री महापात्र

जिस में पूरा आत्मविश्वास है, उस की हार में भी जित है।

08

श्री महापात्र

सत्य को जानने के बाद आचरण में लाना ही जानना सार्थक होगा।

09

श्री महापात्र

मर्यादा का गुण जिनमें है उनको आदर और सन्मान अपने आप मिलते है।

10

श्री महापात्र

पानी बहुत कोमल है मगर निरंतर पत्थर पर से बहे तो पत्थर भी घीस जाता है।

11

श्री महापात्र

आपका हर एक शब्द प्रार्थना और प्रत्येक कर्म यज्ञ बने ऐसा जीवन जीओ।

12

श्री महापात्र

विजेता वो नहीं जो हारा नहीं, विजेता वो है जिसने प्रयास छोड़ा नहीं।

13

श्री महापात्र

श्रद्धा एक ऐसा गुण है, जो रात्रि के अंधकार में भी प्रकाश का अनुभव कराती है।

14

श्री महापात्र

अनुभव मनुष्य को सँवारता है, और लक्ष्य तक पहुँचाता है।

15

श्री महापात्र

जैसे जंख लोहे को खाती है, वैसे ही आलस मनुष्य को खाता है।

16

श्री महापात्र

सच्ची शिक्षा हंमेशा प्रकृति के निरंतर सहवास से प्राप्त होती है।

17

श्री महापात्र

सत्य के रास्ते पे चलनेका सबसे बड़ा फायदा यह है की वहां भीड़ नहीं होती।

18

श्री महापात्र

सफर कितना भी लम्बा क्यूँ न हो, मगर शुरू तो एक कदम से ही होता है।

19

श्री महापात्र

दु:ख आने पर आनंद में रहो, सुख आने पर काबू में रहो।

20

श्री महापात्र

अपने कर्म अच्छे हो तो दुःख को जीवन में कभी स्थान नहीं मिलेगा।

21

श्री महापात्र

यह संसार सभी हिसाब चुकता करने का ठिकाना है।

22

श्री महापात्र

साहसिक आदमी रास्ता खोज लेता है, अगर नहीं मिले तो बना भी लेता है।

23

श्री महापात्र

सच्ची मित्रता आनंद को दुगुना और दुःख को आधा कर देती है।

24

श्री महापात्र

जो परिवर्तन से गभराते है, वे कभी आगे बढ़ नहीं सकते।

25

श्री महापात्र

पैसा कमाने के लिए दिमाग चाहिए, और जीवन जीने के लिए संस्कार चाहिए।

26

श्री महापात्र

जन्म से कोई किसीका मित्र या दुश्मन नहीं होता, ये अपने व्यवहार पर निर्भर होता है।

27

श्री महापात्र

मनुष्य में छिपी हुई जिज्ञासा कई मौके को जन्म देती है।

28

श्री महापात्र

जिनमे अटल आत्मविश्वास है, उनकी हार में भी जित है।

29

श्री महापात्र

निःस्वार्थ भाव से दिया हुवा बलिदान ही सच्ची शौर्यता है।

30

श्री महापात्र

आपत्ति के वख्त शांत मन से सोचना ही सच्ची धैर्यता है।

31

श्री महापात्र

अंत तक धैर्य धारण करने वाले को ही सफलता प्राप्त होती है।

32

श्री महापात्र

निर्भय बनने के बाद ही जीवन में अनेक महान गुण जन्म लेते है।

33

श्री महापात्र

डर सिर्फ धर्म और कर्म का ही होना चाहिए, और किसी का होना अंधविश्वास है।

34

श्री महापात्र

ईश्वर महापुरुषों के माध्यम से जगत में सद्विचार का प्रसार करते है।

35

श्री महापात्र

दुसरों के प्रति उदारता और खुद के प्रति संतोष ही सच्चा जीवन है।

36

श्री महापात्र

बैर लेने का आनंद शायद क्षणभर टीकेगा, मगर क्षमा करने का गौरव सदा टिकता है।

37

श्री महापात्र

दूसरे लोग क्या कर रहे है वो देखने की बजाय मेरा फर्ज क्या है ये समजना बहुत जरुरी है।

38

श्री महापात्र

हमें वो नहीं मिलता जो हमें पसंद होता है, बल्कि वो मिलता है जो हमारे हित में होता है।

39

श्री महापात्र

अपनी सफलता के पीछे कई लोग होते है, लेकिन निष्फलता के जिम्मेदार सिर्फ हम खुद होते है।

40

श्री महापात्र

अहंकार और आत्मविश्वास के बिच बहुत पतली दीवार होती है, जिसे पहचानना सीखो।

41

श्री महापात्र

मौके तो बार बार दस्तक देते है, दरवाजा तो खुद को ही खोलना होता है।

42

श्री महापात्र

उदार मनुष्य जीवन भर आनंद से जीता है और कंजूस मनुष्य आजीवन दुःखी रहता है।

43

श्री महापात्र

प्रभु है और सर्वत्र है, यह हम बोलते है मगर हमारा आचरण ऐसा है की मानो प्रभु है ही नहीं।

44

श्री महापात्र

मनुष्य को जो प्राप्त हुआ है उसका अभिमान नहीं बल्कि गौरव करने से आनंद मिलेगा।

45

श्री महापात्र

अमीर हो या गरीब, जिसको अपने घरमें शांति प्राप्त होती है वही दुनिया का सुखी मनुष्य है।

46

श्री महापात्र

हर मनुष्य कभी तो सच्चा होता ही है, क्यूंकि बंध घड़ी भी २४ घंटे में दो बार सही वख्त बताती है।

47

श्री महापात्र

जीवन के हर मोड़ पे दो रस्ते मिलते है, कोनसे रस्ते पे जाना, वो अपने मन और बुद्धि पे निर्भर होता है।

48

श्री महापात्र

जैसे एरोप्लेन के लिए रनवे चाहिए, ठीक वैसे ही अच्छी आत्माओं के जन्म के लिए संस्कारी घर चाहिए।

49

श्री महापात्र

काम करने से पहले ये न सोचो की लोग बातें करेंगे, लोग तो तब भी बाते करेंगे जब आप कुछ नहीं करेंगे।

50

श्री महापात्र

सूरज न बन सको तो कोई बात नहीं, लेकिन छोटासा दीपक बन कर हजारो दीपक जला सकते हो।

51

श्री महापात्र

यह कितनी आश्चर्य की बात है की लोग जिंदगी बढ़ाना चाहते है, लेकिन सुधारना नहीं चाहते।

52

श्री महापात्र

जब कोई अंतःकरण निर्मल रखकर सत्य का आचरण करेगा, तब वो पवित्रता का महान गुण प्राप्त कर सकेगा।

53

श्री महापात्र

धर्म का अर्थ है नियमो के आधीन रहना, नियमो के आधीन रहने वाला ही सच्चा धार्मिक है।

54

श्री महापात्र

हर मनुष्य को मौके मिलते ही है, सफल मनुष्य परिणाम देता है, जब की निष्फल मनुष्य कारण देता है।

55

श्री महापात्र

मन और बुद्धि " माँ " की दी हुई अनमोल भेंट है, जिसका उपयोग बहुत ही सोच कर करना चाहिए।

56

श्री महापात्र

सफलता देरी से मिले तो निराश न होना चाहिए, क्यूंकि महल बनाने में मकान से अधिक वक्त लगता ही है।

57

श्री महापात्र

किसी भी परिस्थिति में जाग्रत रहने वाला और कभी अशांत न बनने वाला ही सुखी बन सकता है।

58

श्री महापात्र

हर एक मुश्किल एक नए मौके को जन्म देती है।

59

श्री महापात्र

तत्परता मनुष्य को अंतिम लक्ष्य तक ले जाती है।

60

श्री महापात्र

संघनिष्ठा सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

61

श्री महापात्र

मनुष्य की महानता उस के सदवर्तन में है।

62

श्री महापात्र

कर्मो से बनाया हुवा नाम ही उत्तम नाम है।

63

श्री महापात्र

थोड़े साहस से बहुत सारे मौके जूटा सकते है।

64

श्री महापात्र

सबसे बड़ी कला यानि जीवन जीने की कला।

65

श्री महापात्र

संतोषी आदमी दुनिया का सबसे सुखी आदमी है।

66

श्री महापात्र

अनुमान की बजाय अनुभव निश्चित परिणाम देता है।

67

श्री महापात्र

अपनी संतान को सम्पत्ति से अधिक संस्कार दें।

68

श्री महापात्र

सक्षम होने के बावजूद क्षमा देना वो महानता है।

69

श्री महापात्र

धर्म का मूल उदेश्य इन्सान को मानव बनाना है।

70

श्री महापात्र

महान कार्य की प्राथमिक जरूरियात मन की मजबूती है।

71

श्री महापात्र

संतान वंश वृद्धि का प्रतिक नहीं, बल्कि संस्कृति को आगे बढ़ाने का प्रतिक है।

72

श्री महापात्र

अगर मनुष्य संकल्प करे तो खुदके व्यक्तित्व की संपूर्ण कायापलट कर सकता है।

73

श्री महापात्र

विचार कितना भी जाग्रत और ऊँचा क्यों न हो, लेकिन जब तक कार्यशील न हो तब तक उसकी कोई कीमत नहीं होती।

74

श्री महापात्र

ज्ञान और भक्ति दोनों होने चाहिए, ज्ञान से सच और झूठ का पता चलता है, जब की भक्ति से आनंद प्राप्त होता है।

75

श्री महापात्र

मनुष्य सुखी होने के लिए मकान बदलता है, वस्त्र बदलता है, मोबाइल बदले, फिर भी दु:खी ही रहता है, क्यूंकि वह खुदका स्वभाव नहीं बदलता।

76

श्री महापात्र

डाली पे बैठे पंछी को डाली टूटने का भय नहीं होता, क्यूंकि उसको डाली से अधिक भरोसा खुद के पंख पर होता है।

77

श्री महापात्र

जीवन अपनी जरूरत अनुसार ही जीना चाहिए, ईच्छा अनुसार नहीं, क्यूंकि जरूरत तो फ़क़ीर की भी पूरी हो जाती है, और ईच्छा राजा की भी अधूरी रह जाती है।

78

श्री महापात्र

ये जरुरी नहीं कि मनुष्य हर रोज मंदिर जाए तो धार्मिक बने, लेकिन अच्छे कर्म करे तो वो जहाँ रहे वहाँ मंदिर बन जाता है।

79

श्री महापात्र

कुछ भी ना करने से कुछ करना बेहतर है, क्यूंकि "कर्तव्य कर्म" न करने वाला सबसे बड़ा पापी है।

80

श्री महापात्र

मनुष्य की ऊंचाई उसके गुणों से होती है, ऊँची जगह पर खड़े होने से कोई ऊँचा नहीं हो जाता।

81

श्री महापात्र

वाणी से विवेक और सत्य प्रकट होता है, आचरण से मनुष्य की परख होती है।

82

श्री महापात्र

अहंकार से फूल सकते हो पर फ़ैल नहीं सकते।

83

श्री महापात्र

जब मन उदास होता है तब समय बहुत ही लम्बा लगता है, परंतु मन जब प्रफुल्लित होता है तब समय बहुत ही छोटा लगता है।

84

श्री महापात्र

सुख अर्थात् किसी भी बात का मनपसंद संयोग।

85

श्री महापात्र

प्रत्येक अच्छी बात पहले मजाक, फिर विरोध और अंत में स्वीकार ली जाती है।

86

श्री महापात्र

भाग्य उनका साथ देता है, जो प्रत्येक परिस्थिति का सामना करने के बाद भी, अपने लक्ष्य के प्रति अडिग रहते है।

87

श्री महापात्र

जिनका स्वभाव अच्छा होता है उन्हें प्रभाव डालना नहीं पड़ता।

88

श्री महापात्र

आवेश मनुष्य को पीछे धक्का मरता है, संयम मनुष्य को आगे बढ़ाता हे।

89

श्री महापात्र

धर्म आडम्बर का नहीं, आचरण का विषय है।

90

श्री महापात्र

निष्फलता (असफलता) सफलता का विरोधी पहलू नहीं, बल्कि सफलता का ही एक भाग है।

91

श्री महापात्र

हीरा की परख जौहरी कर सकता है, दुसरो के लिये तो पत्थर ही है।

92

श्री महापात्र

अपेक्षा दुःख को जन्म देती है, आनंदी वो है जिसे किसी प्रकार की अपेक्षा ही नहीं है।

93

श्री महापात्र

अनुभव ज्ञान का मार्गदर्शक है।

94

श्री महापात्र

सुख ख़रीदा नहीं जाता और दुःख बेचा नहीं जाता।

95

श्री महापात्र

दूध का जला छाश को भी फूंक फूंक कर पीता है।

96

श्री महापात्र

प्रसन्नता की वृति मन की तमाम कलियों को खिली हुई रखती है।

97

श्री महापात्र

प्रचलन केवल सोना-चांदी का ही हो यह जरुरी नहीं है। सद्गुण का सिक्का विश्वभर में प्रचलित बनता है।

98

श्री महापात्र

नम्रता का सद्गुण व्यक्ति को धार्मिक बनाता है।

99

श्री महापात्र

जैसा बोओगे वैसा पाओगे।

100

श्री महापात्र

किये गये कार्यो का श्रेय दूसरों को देंगे तो कभी भी अहंकार नहीं आयेगा।

101

श्री महापात्र

किसी को एक समय का भोजन कराओ तो एक दिन पेट भरता है परंतु सही समज देकर उसे कमाई करना सिखा दो तो सारी जिंदगी पेट भरता है।

102

श्री महापात्र

जीवन की मुसीबतों के बीच रास्ते इसलिये नहीं मिलते क्योंकी हम सत्य को असत्य और असत्य को सत्य समजकर भ्रम में जीते है।

103

श्री महापात्र

जीवन में मुसीबतें कैसी आयेगी यह हमारे हाथ में नहीं है, परन्तु उनका सामना कैसे करना यह हमारे हाथ में है।

104

श्री महापात्र

निराशावादी को अवसर में भी तकलीफ होती है, जबकि आशावादी तकलीफ में भी अकसर मौका ढूंढ लेता है।

105

श्री महापात्र

श्रद्धा वो ताकत है जो अंधकार में भी प्रकाश का अनुभव कराती है।

106

श्री महापात्र

मनुष्य के भीतर की जिज्ञासा अवसर को जन्म देती है।

107

श्री महापात्र

जितनी तीव्रता से जंग लोहे को खाती है उससे भी अधिक तीव्रता से आलस्य मनुष्य को खा जाता है।

108

श्री महापात्र

भूल हो जाय यह पाप नहीं है, परन्तु समज लेने के बाद भी भूल करना पाप है।

109

श्री महापात्र

परिवर्तन तथा प्रगति से कोई धर्म नष्ट नहीं होता है बल्कि उसका विकास ही होता है और दृढ बनता है, क्योंकि परिवर्तन ही प्रकृति का सनातन गुणधर्म है।

110

श्री महापात्र

आवश्यकता और इच्छा के बीच के भेद को जो परख सकता है, वो निरंतर सुख प्राप्त कर सकता है।

111

श्री महापात्र

उलजन के साथ दौड़ने की अपेक्षा की बजाय आत्मविश्वास के साथ चलना अच्छा है।

112

श्री महापात्र

मनुष्य को स्वयं की गलतफहमी जितनी आड़े आती है उतनी कोई वस्तु या व्यक्ति आड़े नहीं आती।

113

श्री महापात्र

अधिकार और कर्तव्य दोनों ऐसी बाबत है जो एक दुसरे से जुडी हुइ है।

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